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एक सही शोध के बिना क्रिप्टो करेंसी मे इन्वेस्टमेंट करना जोखिम भरा भी हो सकता है ।

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 39 साल पहलें अमेरिकी के एक क्रिप्टोग्राफर डेविड चाउम ने एक अज्ञात क्रिप्टोग्राफिक इलेक्ट्रॉनिक पैसे की कल्पना की, 1995 मे उसको डिजीकैश की मार्फत इसे जारी किया,जिससे बाजार का अच्छा खासा सहयोग मिला।शायद यही कारण रहा की 1996 मे नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी ने  एनक्रिप्टेड इलेक्ट्रॉनिक कैश की क्रिप्टोग्राफ़ी का एक पेपर प्रकाशित किया, जिसमें एक क्रिप्टोक्यूरेंसी प्रणाली का वर्णन था,बस उसके बाद बाजार मे माँग और उत्सुकता का एक जबरदस्त दौर आया। जानकारों की माने तो। 2009 के दौरान जब पुरा युरोप मे क्रिस्टो एक चर्चा व शोध का विषय बन गई थी, वही कौन जानता था की ये डिजिटल करेंसी के एक नये दौर का साल है।इसी दौरान विकेन्द्रीकृत क्रिप्टोक्यूरेंसी, बिटकॉइन का बाजार मे आना हुआ ।ऐसा माना जाता है की एक बेनामों डेवलपर ने हैश फ्कशन का उपयोग कर इसे बाजार मे उतारा था।फिर तो जैसे एक के बाद एक नये डिजिटल कैश का दौर चला। 1983 के दौरान से 2022 का सफर तय करने वाली इस क्रिप्टो करेंसी ने सरकारों के चाहतें और ना चाहतें अपनी एक अलग पहचान के साथ-साथ एक इमानदार व्यवस्था बनाई है भारत मे भी अब इसका असर देखने को मि...

कुदरत को क्या दिया?

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 जन्मदिन तो आप सब मनाते होगें पर क्या आपने कभी ये सोचा आपके जन्म को जीवन देने वाली पृकृति को हमने क्या दिया है।ऐसा क्या दिया है जिसके लिये पृकृती  आपको धन्यवाद दे सकें। क्या आपने जल,जंगल,जीव और जमीन के बचाव पर काम किया? जो जल हमे जीवन  और जो वन हमे प्राण वायु ,स्वच्छ वातावरण देता हैं ,जिन जीवो ने हमे बहुत कुछ दिया और जिस जमीन ने हमे अपना ऑचल दिया ,इन सबको हमने क्या दिया। अब भी समय है। हम अपनी पृकृती मॉं को बचाने की पहल अपने घर से शुरू करें ।

आखिर कब तक हम पीछे चलने वाली भीड़ का हिस्सा रहेंगे?

 मेरी हमेशा से कोशिश रही है की मै उन मुद्दों पर लिखूँ, जो समय,समाज और संस्कृति की माँग हो,आज जिस मुद्दें पर मै आपसे बात करना चाहता हूँ, वो एक ऐसा विषय है,जो हम सभी को कटघरे मे खड़ा करता है,हम सभी ने इस सच से कभी ना कभी तो मुँह छिपाया होंगा, क्यो की आज देश मे एक ऐसी परम्परा बन गईं है। जो ये कहने वालों की एक बड़ी भीड़ को ये कहते हूँ, एक तरफ कर देती है की "जो ये कह कर अपना पल्ला झाड़ लेती है की ये मेरी जिम्मेदारी नही है" या "इस मामले मे मै क्या कर सकता हूँ "  इस सोच ने जहाँ असमाजिक तत्वों के हौसले बुलंद किये,वही दुसरी ओर राजनेताओं को निरंकुश कर दिया। क्योकी मेरे महान भारत मे लोग असहमत होकर भी मौन रहेंगे पर सवाल नही करेगें। यह जानतें हुए की यह गलत हो रहा है, विरोध करने का हौसला नही जुटा पायेंगे, राजनीतिक,समाजिक और धार्मिक मुद्दों की आड़ मे कुछ मुट्ठी भर लोग सत्ता हासिल कर ले,शहर जला दे या नफरत के सहारे वो कुछ भी कर दे पर हम तो मूक दर्शक बने रहेंगे,क्यो एक रंगमंच की स्टेज पर किरदार निभाने की क्षमता से हम भाग गये है,हम सिर्फ तमाशा देख तालियां बजायेंगे आखिर कब तक हम ...